आज जब भारत मोटापा, मधुमेह, थायरॉइड, फैटी लिवर, उच्च रक्तचाप और जीवनशैली से जुड़ी अनेक बीमारियों की चुनौती का सामना कर रहा है, तब सही पोषण और वैज्ञानिक आहार परामर्श की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में कुछ विशेषज्ञ अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से समाज में विशेष पहचान बना रहे हैं। उन्हीं में से एक नाम है डॉक्टर सरमील कुमार, जो आज उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख आहार विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।
डॉक्टर सरमील कुमार की पहचान केवल एक डाइटिशियन के रूप में नहीं है, बल्कि वे स्वास्थ्य जागरूकता के एक ऐसे मिशन का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को दवाओं पर निर्भर होने के बजाय सही पोषण और जीवनशैली के माध्यम से स्वस्थ बनाना है।
उनकी यात्रा पूर्व भारतीय वायु सेना के अनुशासित जीवन से शुरू हुई। सेना में प्राप्त अनुशासन, समर्पण और सेवा भावना को उन्होंने पोषण विज्ञान के क्षेत्र में उतारा और आज 24 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ हजारों लोगों को स्वस्थ जीवन की दिशा प्रदान कर रहे हैं।
डॉक्टर सरमील कुमार ने डायटेटिक्स एवं फूड सर्विस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्राप्त की है तथा हॉस्पिटल मैनेजमेंट में भी विशेषज्ञता हासिल की है। अहमदाबाद के प्रतिष्ठित डॉ. जीवराज मेहता हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य किया, जिसने उनके व्यावसायिक अनुभव को और मजबूत बनाया।
उनकी विशेषज्ञता केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं है। वे मोटापा, मधुमेह, थायरॉइड, पीसीओडी/पीसीओएस, हृदय रोग, गर्भावस्था पोषण, बच्चों का पोषण, खेल पोषण, वृद्धावस्था पोषण, गट हेल्थ तथा चिकित्सीय पोषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। यही कारण है कि विभिन्न राज्यों और देशों से लोग उनसे परामर्श लेने के लिए संपर्क करते हैं।
डॉक्टर सरमील कुमार का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति का शरीर अलग होता है और इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग आहार योजना की आवश्यकता होती है। वे किसी भी बीमारी के केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि उसके मूल कारण पर काम करने की सलाह देते हैं। यही सोच उन्हें सामान्य डाइट सलाहकारों से अलग बनाती है।
क्लिनिक तक सीमित रहने के बजाय वे समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और विभिन्न संस्थानों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों एवं व्याख्यानों के माध्यम से वे हजारों लोगों तक सही पोषण का संदेश पहुंचा चुके हैं। साथ ही वे पोषण एवं गृह विज्ञान के विद्यार्थियों को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान कर भविष्य के विशेषज्ञ तैयार करने में भी योगदान दे रहे हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान भी उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उस कठिन समय में उन्होंने पोषण संबंधी सटीक मार्गदर्शन देकर अनेक लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने में मदद की। उनके लेख देश के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं और मीडिया ने भी उनके योगदान की प्रशंसा की है।
डॉक्टर सरमील कुमार की सफलता का आधार केवल उनकी शिक्षा या अनुभव नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उनकी संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वास्थ्य के प्रति समर्पण है। यही कारण है कि आज एस के डाइट क्लिनिक बुंदेलखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र का एक विश्वसनीय नाम बन चुका है।
डॉक्टर सरमील कुमार का संदेश सरल है—
“स्वास्थ्य किसी चमत्कार, टोटके या शॉर्टकट से नहीं मिलता। सही पोषण, सही जीवनशैली और सही मार्गदर्शन ही अच्छे स्वास्थ्य का वास्तविक आधार है।”
आज जब लोग इंटरनेट पर उपलब्ध अधूरी जानकारी के कारण भ्रमित हो रहे हैं, तब डॉक्टर सरमील कुमार जैसे अनुभवी आहार विशेषज्ञ लोगों को सही दिशा दिखाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
स्वास्थ्यव ही जीन की सबसे बड़ी पूंजी है, और सही पोषण उस पूंजी की सबसे मजबूत सुरक्षा।
कॉपीराइट © डॉक्टर सरमील कुमार, डाइटिशियन
मुख्य आहार विशेषज्ञ | चिकित्सा विभूति पुरस्कार प्राप्त
एस के डाइट क्लिनिक, झांसी एवं उरई

