आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें जल्दी और सुविधाजनक चीज़ों की आवश्यकता होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपनी सेहत के साथ समझौता करें। आजकल हमारी दिनचर्या में ब्रेड एक सामान्य नाश्ता बन चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हमारी सेहत के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है? खासकर बच्चों के लिए, ब्रेड में छिपे रासायनिक तत्व हमारी सेहत पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि क्यों बासी रोटी ब्रेड से बेहतर विकल्प है।
ब्रेड में अनावश्यक रासायनिक तत्व
अधिकांश बाजार में उपलब्ध ब्रेड में संरक्षक (preservatives), फुलाने वाले एजेंट (leavening agents), और ब्लीचिंग एजेंट (bleaching agents) होते हैं, जो इसे लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने के लिए और सफेद बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये रसायन न केवल पाचन तंत्र पर असर डालते हैं, बल्कि धीरे-धीरे शरीर में विषाक्तता भी उत्पन्न कर सकते हैं। सफेद ब्रेड में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड आटा होता है, जो स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। आइए, जानते हैं कि ब्रेड में कौन-कौन से प्रमुख रासायनिक तत्व होते हैं और वे हमारे शरीर को किस प्रकार नुकसान पहुंचा सकते हैं:
- कैल्शियम प्रोपियोनेट (Calcium Propionate)
- उपयोग: यह प्रिजर्वेटिव ब्रेड में फफूंद (mold) और बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकने के लिए उपयोग किया जाता है।
- संभावित नुकसान: कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कैल्शियम प्रोपियोनेट का अधिक सेवन करने से सिरदर्द, ध्यान की कमी (ADHD), नींद की कमी, और पेट में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- एज़ोडिकार्बोनामाइड (Azodicarbonamide)
- उपयोग: यह ब्रेड को मुलायम और अधिक फूला हुआ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे “आटे का कंडीशनर” भी कहा जाता है।
- संभावित नुकसान: यह केमिकल सांस से संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है और कुछ देशों में प्रतिबंधित है। इसे लंबे समय तक सेवन करने से श्वसन संबंधी दिक्कतें, एलर्जी और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
- सोडियम स्टीयरॉयल लैक्टिलेट (Sodium Stearoyl Lactylate)
- उपयोग: यह एमुलसिफायर ब्रेड की संरचना को मजबूत और मुलायम बनाए रखने के लिए उपयोग होता है।
- संभावित नुकसान: यह केमिकल पेट की समस्याओं और त्वचा पर एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकता है। कुछ लोगों को इससे सूजन और जलन की समस्या हो सकती है।
- मोनो और डाईग्लिसराइड्स (Mono and Diglycerides)
- उपयोग: ब्रेड की बनावट को बेहतर बनाने और शेल्फ लाइफ को बढ़ाने के लिए इनका उपयोग होता है।
- संभावित नुकसान: यह फैट्स ट्रांस फैट्स में बदल सकते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
- हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप (High Fructose Corn Syrup)
- उपयोग: मिठास बढ़ाने के लिए इसका उपयोग होता है, विशेष रूप से वाणिज्यिक ब्रेड में।
- संभावित नुकसान: यह मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, लिवर की समस्याएं, और हृदय रोगों का कारण बन सकता है। इसके नियमित सेवन से शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है।
- क्लोरीन डाइऑक्साइड (Chlorine Dioxide)
- उपयोग: मैदा को सफेद और साफ दिखाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- संभावित नुकसान: यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स को कम कर सकता है और लिवर व किडनी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक सेवन करने से शरीर में विषाक्तता भी बढ़ सकती है।
- पोटैशियम ब्रोमेट (Potassium Bromate)
- उपयोग: यह आटे को फुलाने और ब्रेड को हल्का और हवादार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- संभावित नुकसान: पोटैशियम ब्रोमेट को कैंसरजन (carcinogenic) माना जाता है। इसका अधिक सेवन करने से किडनी की समस्याएं, थायरॉइड और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
- बेंज़ॉइल पेरोक्साइड (Benzoyl Peroxide)
- उपयोग: मैदा को ब्लीच करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- संभावित नुकसान: यह पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है और शरीर में विषाक्तता (toxicity) का कारण बन सकता है।
- सोडियम एलुमिनेट (Sodium Aluminum Phosphate)
- उपयोग: यह एक लीवनिंग एजेंट है जो ब्रेड को फुलाने में मदद करता है।
- संभावित नुकसान: यह एल्यूमिनियम के स्तर को बढ़ाता है, जो मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। अधिक मात्रा में एल्यूमिनियम का सेवन अल्जाइमर जैसी मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।
- सोडियम मेटाबिसल्फाइट (Sodium Metabisulfite)
- उपयोग: ब्रेड में इस केमिकल का उपयोग आटे को मुलायम रखने के लिए किया जाता है।
- संभावित नुकसान: यह सांस की समस्याएं, एलर्जी, और पेट से संबंधित समस्याएं पैदा कर सकता है। संवेदनशील लोगों में यह एलर्जी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकता है।
बच्चों पर बढ़ते खतरे
डॉ सरमील कुमार के अनुसार बच्चे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। उनके शरीर का विकास हो रहा होता है और ऐसे में रासायनिक तत्व उनके मस्तिष्क, हड्डियों और संपूर्ण स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। इनमें कुछ रसायन, जैसे ब्रोमेट और पोटैशियम परबिन, बच्चों के विकास को अवरुद्ध कर सकते हैं और दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, ब्रेड में चीनी और अन्य कृत्रिम तत्व बच्चों में मोटापा और अन्य चयापचय संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
नकली ब्राउन ब्रेड का धोखा
आजकल बाजार में कई दुकानें सफेद ब्रेड को नकली तरीके से ब्राउन ब्रेड में बदलने का काम कर रही हैं। इसके लिए वे सफेद ब्रेड पर रंग या अन्य रासायनिक तत्वों का उपयोग कर इसे ब्राउन दिखाते हैं। इस प्रक्रिया से ब्रेड और भी हानिकारक हो जाती है, क्योंकि अब इसमें और अधिक रासायनिक तत्व मिल जाते हैं। असली ब्राउन ब्रेड पूरी तरह से गेहूं से बनाई जाती है और उसमें प्राकृतिक फाइबर होता है, जबकि ये नकली ब्राउन ब्रेड केवल दिखावे के लिए होती है।
बासी रोटी की श्रेष्ठता
अब सवाल उठता है कि ब्रेड की जगह क्या खाया जाए? डॉ सरमील कुमार के अनुसार घर की बनी हुई बासी रोटी ब्रेड का एक आदर्श विकल्प है।
- स्वास्थ्यवर्धक: बासी रोटी पूरी तरह से प्राकृतिक होती है और इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक रासायन या संरक्षक नहीं होते। यह हमारे पाचन तंत्र के लिए भी हल्की और सुपाच्य होती है।
- पोषक तत्वों से भरपूर: रोटी में भरपूर मात्रा में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन होते हैं, जो शरीर के लिए आवश्यक होते हैं।
- पाचन में सहायक: बासी रोटी का सेवन करना पाचन तंत्र के लिए लाभकारी होता है। यह हल्की होती है और इसे आसानी से पचाया जा सकता है। बासी रोटी में ऐसा कोई तत्व नहीं होता जो पेट में एसिडिटी या भारीपन पैदा करे, इसलिए यह उन लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प है जो पेट की समस्याओं से परेशान रहते हैं।
- वजन घटाने में सहायक
बासी रोटी में कम कैलोरी होती है, जिससे यह वजन घटाने में भी मददगार होती है। इसे खाने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और भूख कम लगती है, जिससे ओवरईटिंग की संभावना कम होती है। - हड्डियों के लिए फायदेमंद
रात को बनाई गई रोटी को अगले दिन खाने से इसमें कैल्शियम की मात्रा बनी रहती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
डॉ सरमील कुमार के अनुसार ब्रेड में मौजूद अनावश्यक रसायन हमें धीमे-धीमे बीमार बना रहे हैं, और हमारे बच्चों के लिए यह और भी अधिक खतरनाक हो सकता है। इसलिए, जितना हो सके घर की बनी ताजी या बासी रोटी का सेवन करें, क्योंकि ब्रेड से बासी रोटी हमेशा बेहतर है।
कैसे करें बासी रोटी का सेवन?
बासी रोटी का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। आप इसे दही के साथ खा सकते हैं या फिर हल्के से गरम करके दूध में मिलाकर भी खा सकते हैं। यह संयोजन पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है है।
डॉ सरमील कुमार के अनुसार जहां ब्रेड आधुनिकता और सुविधा का प्रतीक हो सकती है, वहीं बासी रोटी एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। हमारी परंपराओं में सदियों से बासी रोटी का सेवन किया जाता रहा है और यह हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए अगली बार जब आपके सामने ब्रेड और बासी रोटी का विकल्प हो, तो बासी रोटी को चुनें। यह सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
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Copyrights © of Dietitian Sarmil Kumar
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